STORYMIRROR

Achyut Umarji

Drama

3  

Achyut Umarji

Drama

ऋतु

ऋतु

1 min
196

बारिश तेज है...

घर के सामने...

पानी भरा हुआ है...

चलो पानी में उतरते हैं...


कागद की नाव बनाते हैं...

उन्हें पाणी में छोड़ते हैं...

बस अपने हल्के हाथों से...

बचपन की यादें ताजा करते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama