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SMRITI SHIKHHA

Abstract Classics Inspirational

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SMRITI SHIKHHA

Abstract Classics Inspirational

ज़िंदगी का सफर

ज़िंदगी का सफर

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ज़िंदगी का सफर है बहुत लंबा और मुश्किल

जिसमें पड़ती है सब को करनी बहुत मेहनत 

फिर भी है ज़िंदगी सबकी बड़ी हीं

खुशहाल बस है बात सबके नज़रिए की 


क्यों की जैसे देखे खुदकी दृष्टि ठीक वैसे हीं दिखे

पूरी श्रृष्टि और केहेते सब उसके साथ ऐसे हैं 

जैसे देखे अपनी नज़र पूरियां दुनिया को वैसे हीं

ठीक दिखे नज़रिया उसको पूरी दुनिया की।


सबकी अपनी ज़िंदगी में अपना अपना काम है जो है

अलग अलग या फिर समान कुछ जान के साथ 

मगर सपने है सब के आखों में बहुत जो देती नहीं

किसीको सोने अगर है वो सपना बदलना हकीकत में उसको 


सपनों को करने सच अपनी आज़ादी पाना

और स्वतंत्र हो कर खड़ा होना अपनी पैरों पर 

जब होते हैं सब असल में बड़े और बाहर अपने माता पिता के

छत्र छाया से तब है होता शुरू असल ज़िंदगी सबकी।


केहेता है क्या आखिर ज़िंदगी का सफर की होगा नहीं

वो आसान मगर अगर हिम्मत हो और दिल से हो तमन्ना

सच करने की अपने सपने और पूरी करनी अपनी ज़िद

तो फिर होना पड़ेगा साहसी और जोशीला जो लेते हैं

अपने फैसले सारे रहकर पूरे होश में और पछताते नहीं लेकर फैसले 


जो उम्मीद पर नही करते हैं भरोसा सिर्फ करते जाते

अपने काम पूरे शिद्दत से लेकर निष्ठा पूरे दिल से और मन से 

वही कर पाते हैं अपने सपने पूरे क्योंकि ज़िंदगी तो

अपने कर्म पर होती टिकी बाकी भविष्य तो हमारा बन चुका है

भगवान के हाथों जो है हरे लकीरों में पहले से लिखा।


सफर किसिका होता टीका उसके ज़िद उसके भरोसे और

विश्वास पर जो बढ़ाता रेहेता हमेशा हिम्मत और साहस उसका 


की पहुंच जाएगा वो मंजिल पर अपनी अगर रहेगा वो हमेशा

सही रास्ते पर टिका जो पहुंचाती है उसको

उस जगह पर जहां होता है उसके सारे सपने पूरे 

करने के लिए अपने सपने पूरे पड़ता है

सबको चलना कांटो से भरी रास्तों पर ताकि मिल सके

आखिर में फल उसका बड़ा मीठा 


ताकि हो जाए आखिर में सारे तमन्ना सारे ख्वाहिशें पूरे

और पूरी हो सबके दुआएं और मन्नतें और

अगर बहा के पैरों से खून अगर मिले

आखिर में सुकून तो है वो ज़िंदगी बड़ी अनमोल।


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