STORYMIRROR

Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Children

4  

Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Children

जीवन के रंग

जीवन के रंग

1 min
220


खुशी और गम मिले, जीवन के सब रंग,

सुहाने मौसम में लगे, पीये हुये हम भंग,

बोर हुये संसार में, करे उल्टी सीधी बात,

मन मंदिर में छिड़ जाती, अद्भुत सी जंग।।


जीवन कभी छोटा लगे, कभी लगे पहाड़,

कभी रोते बीत रही, कभी मारते हैं दहाड़,

विभिन्न रंग कहलाते हैं, नाम है जिंदगानी,

बुरी बुराई जगत को कर सकती दो फाड़।।


लाख बुरे लोग हैं, अच्छों की भी भरमार,

कभी धोखे में जी रहे, कभी मिलता प्यार,

बस चंद दिनों की जिंदगी, सोच जरा अब,

आएगी फिर वो घड़ी, जाएगा जंग तू हार।।


सोच समझकर काम ले, कर भलाई काम,

धर्म कर्म में लीन रह, फिर होगा जन नाम,

नहीं पता कब जाना, क्यों करता जग पाप,

जग ही नरक द्वार है, जग ही लगता धाम।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama