STORYMIRROR

Pankaj Kumar

Tragedy

4  

Pankaj Kumar

Tragedy

जि़दगी की हकीकत

जि़दगी की हकीकत

1 min
23K

ज़िन्दगी की हकीकत क्या है 

जीने की असली वजह क्या है 

क्या है जो इंसान को जोड़ती है 

क्या है जो उसे अंदर से तोड़ती है 


दौलत, शोहरत, रुतबा, रसूख 

बेमाने क्यों लगते है 

यार - दोस्त, रिश्ते - नाते 

सब बेगाने क्यों लगते हैं


हर कदम पर, हर मोड़ पर 

रुस्वाई क्यों लगती है 

भीड़ में, शोर में हर दम 

तन्हाई क्यों लगती है 


क्यों इंसान ज़िन्दगी से दूर जाना चाह्ता है 

किस लिए खुद को ही मिटाना चाहता है 

ज़िन्दगी खुदा की नेमत है 

ये एहसास क्यों नहीं रहता


दूसरों से उम्मीद ना भी हो 

खुद पर विश्वास क्यों नहीं रहता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy