STORYMIRROR

Meenakshi Kilawat

Tragedy

3  

Meenakshi Kilawat

Tragedy

झोपड़ी में

झोपड़ी में

1 min
233

दीपावली तुम आना मेरे गरीब के झोपड़ी में

हमारे तो दो वक्त की रोटी में पकवान समाये हैं।


एक टिमटिमाते तेल के दीपक की लौ से भी

अमावस की काली रात भी सपनों में सजाये हैं।


दीप जलाकर हम भी खूब दिल को बहलायेंगे

जलाके दीपक आँखो के तेल से हम नहलाये हैं। 


घरों में चमक रही है रंगीन रौशन रोषणाई

वही चकाचौंध आज नैनों में पराये साये हैं।


आज की परेशानियों को ना दिल में सजाते हैं

हम मतवाले ना कल की चिंता में रहते खोये हैं।


यह दीपावली दीपों की महफिलें बड़ों के लिये है

हम तो इसे शामियानों में बिछाने खातिर आये हैं।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy