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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Fantasy Inspirational Others

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Fantasy Inspirational Others

जब दौलत गुजरती है

जब दौलत गुजरती है

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बड़ी खामोशियों से घर में जब दौलत गुज़रती है,

तो जेह्नो-दिल के कोनों से भरी शुहरत गुज़रती है ।।


बहुत हैरान होकर देखती है हाल खुद अपना,

कभी इनसान की बस्ती से' जो क़ुदरत गुज़रती है ।


इरादा टूट जाता है कसक उठती है दिल में, जब,

कभी मायूस गलियों से कोई हसरत गुजरती है ।


मरासिम को परखने की कभी भी भूल मत करना,

परखने पर मरासिम की कहीं मैयत गुज़रती है...।


सुख़न के दौर में जीना कहाँ आसान है साहिब,

ग़ज़ल तब होती' है जब दिल पे' इक आफ़त गुज़रती है । 


चलो इंसानियत की सब किताबें बेंच दें हम भी,

उसूल-ओ-इल्म सब बिकता है जब क़ीमत गुज़रती है ।



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