Vijay Kumar parashar "साखी"
Classics
ये हमारी कैसी मजबूरी है
इंसान की इंसान से दूरी है।
वो क्यों कहते फ़िरते हैं
हमारी ही जाति सिर्फ़ पूरी है।
भगवान तो हमने बनाया,
बाकी राम ने तो खाये
शबरी के बैरों की भी धुरी है।
"गोवंश पर अत्...
"चमत्कार"
"दौर मुफ़लिसी ...
"दुआ-बद्दुआ,
"आंटा-सांटा"
"सिंदूर"
"बरसात"
"शांत और स्थि...
"दोगले इंसान"
नहीं, संकीर्ण हो सकती है ईश्वर हां ! ईश्वर सुना तुमने ! प्रेम ईश्वर है। नहीं, संकीर्ण हो सकती है ईश्वर हां ! ईश्वर सुना तुमने ! प्रेम ईश्...
जीवन में जो हैं रहते सतर्क सावधान, होते सफल जग में उठाते नहीं नुकसान। जीवन में जो हैं रहते सतर्क सावधान, होते सफल जग में उठाते नहीं नुकसान।
हाँ तेरे बारे में सोचने लगी हूँ तुझसे बेशुमार प्यार करने लगी हूँ। हाँ तेरे बारे में सोचने लगी हूँ तुझसे बेशुमार प्यार करने लगी हूँ।
जीवन भर करती सेवा है, सब के मन को प्यारी लगती। जीवन भर करती सेवा है, सब के मन को प्यारी लगती।
गूंज रही जहां सारे, उनकी गाथा शान, अति बलशाली थे, आज जगत पहचान।। गूंज रही जहां सारे, उनकी गाथा शान, अति बलशाली थे, आज जगत पहचान।।
इतने दर्द पर भी तेरे सितमगर देख हम कैसे मुस्कुराते हैं। इतने दर्द पर भी तेरे सितमगर देख हम कैसे मुस्कुराते हैं।
यह जिंदगी मिली है बड़ी मुश्किल से कभी तो इसे खुलकर जी लो। यह जिंदगी मिली है बड़ी मुश्किल से कभी तो इसे खुलकर जी लो।
आसाँ नहीं है दिल से उसकी हर निशानी काटना। आसाँ नहीं है दिल से उसकी हर निशानी काटना।
अपने घर से अपने कंधों पर प्यार और सम्मान सहित विदा करना होगा। अपने घर से अपने कंधों पर प्यार और सम्मान सहित विदा करना होगा।
शब्द तो काया है मैं आत्मरूप पृथक निज काया से। शब्द तो काया है मैं आत्मरूप पृथक निज काया से।
तुम्हारे लिए मैं क्या हूँ नहीं जानता मैं तुम नैया का मेरी किनारा रही हो...... तुम्हारे लिए मैं क्या हूँ नहीं जानता मैं तुम नैया का मेरी किनारा रही हो......
इसलिए कभी भी किसी का दिल ना दुखाना, किसी के जज्बात से ना खेलना। इसलिए कभी भी किसी का दिल ना दुखाना, किसी के जज्बात से ना खेलना।
क्योंकि सुबह उठकर फिर काम पर जाना है। क्योंकि सुबह उठकर फिर काम पर जाना है।
कुछ भी हो ना तुम दिल दुखाना किसी का , ना किसी के जज़्बात से खेलना। कुछ भी हो ना तुम दिल दुखाना किसी का , ना किसी के जज़्बात से खेलना।
होगी कब पूर्ण नहीं पता पर सच है मैं स्त्री बनना चाहता हूं। होगी कब पूर्ण नहीं पता पर सच है मैं स्त्री बनना चाहता हूं।
घूट -घूट प्यास होंठों ने, होंठों से पी ली थी, वो सुबह बेहद खूबसूरत आई थी। घूट -घूट प्यास होंठों ने, होंठों से पी ली थी, वो सुबह बेहद खूबसूरत आई थी।
प्रेमाभुषण से अलंकृत इसे हो जाने दो! न रोको...प्रेम प्रसून पर इसे उड़ जाने दो। प्रेमाभुषण से अलंकृत इसे हो जाने दो! न रोको...प्रेम प्रसून पर इसे उड़ जाने द...
हर पल तुमको शीतलता देने की खातिर। जीवन भर जलता जाए वो है बागवान।। हर पल तुमको शीतलता देने की खातिर। जीवन भर जलता जाए वो है बागवान।।
साथ नंद का लाल मुरली बुलाती हमको जिसकी नित्य पनघट पे। साथ नंद का लाल मुरली बुलाती हमको जिसकी नित्य पनघट पे।
पार हो जाये उजालों की धुंधली सी शमां तेरा अक़्स बनकर उभर आये... पार हो जाये उजालों की धुंधली सी शमां तेरा अक़्स बनकर उभर आये...