Vijay Kumar parashar "साखी"
Classics
ये हमारी कैसी मजबूरी है
इंसान की इंसान से दूरी है।
वो क्यों कहते फ़िरते हैं
हमारी ही जाति सिर्फ़ पूरी है।
भगवान तो हमने बनाया,
बाकी राम ने तो खाये
शबरी के बैरों की भी धुरी है।
"गोवंश पर अत्...
"चमत्कार"
"दौर मुफ़लिसी ...
"दुआ-बद्दुआ,
"आंटा-सांटा"
"सिंदूर"
"बरसात"
"शांत और स्थि...
"दोगले इंसान"
हकीकत में नहीं मिलता वो इसपे गिला क्या करें 'आयुष' ख्वाबों में आता है ये क्या कम है.. हकीकत में नहीं मिलता वो इसपे गिला क्या करें 'आयुष' ख्वाबों में आता है ये क्य...
मुझे लौटा दो पिकनिक का वो ज़माना। मुझे लौटा दो पिकनिक का वो ज़माना।
सबकी नैया पार लग जाती है सबकी नैया पार लग जाती है
वक्त बदलते देर नहीं लगती जाने कब छप्पड़ फाड़ कर तेरे आंगन खुशियां आ जाये। वक्त बदलते देर नहीं लगती जाने कब छप्पड़ फाड़ कर तेरे आंगन खुशियां आ जाये।
सारे संसार के नज़र में होगी तू कोई और ही मगर भगवान से कम नहीं तू मेरे लिए ! सारे संसार के नज़र में होगी तू कोई और ही मगर भगवान से कम नहीं तू मेरे लि...
तेरी बेहया दर्द में टूटे इस तरह की जूड़े कैसे ? तेरी बेहया दर्द में टूटे इस तरह की जूड़े कैसे ?
याद रखना, मुझसे कभी भी कुछ भी कह सकते हो तुम। याद रखना, मुझसे कभी भी कुछ भी कह सकते हो तुम।
जिन्दगी का ये सबक हर पल तू अपने पल्लू से गांठ बांध लें। जिन्दगी का ये सबक हर पल तू अपने पल्लू से गांठ बांध लें।
रूह की तपन मिटाने को, आबरू बचाने को "शकुन", संवाद जरूरी है। रूह की तपन मिटाने को, आबरू बचाने को "शकुन", संवाद जरूरी है।
परा है जो सच की साधना की सेज उसी पर आ पायेगी नींद गहरी विशेष। परा है जो सच की साधना की सेज उसी पर आ पायेगी नींद गहरी विशेष।
तो पिता से जीवन जीने का नाम संग दृढ़ आधार मिलता है। तो पिता से जीवन जीने का नाम संग दृढ़ आधार मिलता है।
मैं भी आऊँगा राह तेरेआज नहीं तो कल सही। मैं भी आऊँगा राह तेरेआज नहीं तो कल सही।
तेरे सी बन सब में बंट न पाऊँगी राधा सी बन केवल तेरा बन कर ही मिट जाना है। तेरे सी बन सब में बंट न पाऊँगी राधा सी बन केवल तेरा बन कर ही मिट जाना है।
और हर चुनौती को पार करना आसान नहीं पर करते जाओ। और हर चुनौती को पार करना आसान नहीं पर करते जाओ।
तुझे चोर कहूँ या कि गुणचोर, दिल जिगर की एक सरकार है। तुझे चोर कहूँ या कि गुणचोर, दिल जिगर की एक सरकार है।
खुश रहे, खुश रखें जीवन का, सार जितना हो, सके मेरा करो, इस्तेमाल। खुश रहे, खुश रखें जीवन का, सार जितना हो, सके मेरा करो, इस्तेमाल।
किया था मुझसे उन्होंने नहीं फिर वह क्या समझते होता क्या है प्यार व्यार। किया था मुझसे उन्होंने नहीं फिर वह क्या समझते होता क्या है प्यार व्यार।
इनके किसी सवाल का जवाब हमारे पास तो नहीं है । इनके किसी सवाल का जवाब हमारे पास तो नहीं है ।
लब्जों से हर मौसम सुहाना, लब्जों से ही आतंक और प्रेम शायराना लब्जों से हर मौसम सुहाना, लब्जों से ही आतंक और प्रेम शायराना
कभी गम कभी खुशी जीवन की है ये रीत यह ही है जीवनधारा। कभी गम कभी खुशी जीवन की है ये रीत यह ही है जीवनधारा।