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Manjul Manzar Lucknowi

Tragedy


4.0  

Manjul Manzar Lucknowi

Tragedy


जागा है मानव

जागा है मानव

1 min 47 1 min 47

सुप्त अवस्था में था जो पड़ा निज

भाषा विकास को जागा है मानव।

भाग्य भरोसे ही छोड़ के बैठा था

कर्म के पीछे वो भागा है मानव।

शब्द का ठीक करे उच्चारण

सोने पे तो वो सुहागा है मानव।

हिन्द में हिन्दी का ज्ञान नहीं

जिसको वह घोर अभागा है मानव।


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