Haripal Singh Rawat (पथिक)
Drama
कल स्याह रात,
दूधिया-असित।
खुले केशों में,
मिल गया....
फिर वही ख्वाब,
ड़रावना,
कुछ सच सा।
ना इत्तफ़ाकन...
इत्तफ़ाक से।
अगम्य राह
नूतन वत्सर
सहानुभूतिक जि...
भृंग उर
इश्क़-इस्बात
कौन पथिक?
'इश़्क सौ बार...
खुदकुशी
भाव और पथिक
सोचे मानव समाज एक बार पुनः छोड़ के भेदभाव का मानसिक विकार। सोचे मानव समाज एक बार पुनः छोड़ के भेदभाव का मानसिक विकार।
कोई बाल मन सी हसरत उठेगी देखना फूँक मार फिर उड़ाएगा कोई बाल मन सी हसरत उठेगी देखना फूँक मार फिर उड़ाएगा
जिन्होंने मिटाया रात्रि का अंधेरा घना जिन्होंने मिटाया रात्रि का अंधेरा घना
भाई बड़े बड़े व्यापार आ गये सबके अपने अपने॥ भाई बड़े बड़े व्यापार आ गये सबके अपने अपने॥
प्यार की ज़ाम छलकाने के लिये सनम, मैं तुझे देखने के लिये बेकरार हो रहा हूं। प्यार की ज़ाम छलकाने के लिये सनम, मैं तुझे देखने के लिये बेकरार हो रहा हूं।
खास की मन को मिल जाये, शांति उपहार पर खत्म नहीं हो रहा है, साखी का इंतजार खास की मन को मिल जाये, शांति उपहार पर खत्म नहीं हो रहा है, साखी का इंतजार
धर्म पे लड़ो - मरो , जंगल का सबसे बड़ा ये मुद्दा है जंगल उस ओर बढ़ रहा जहाँ नफरत का गड्ढा है धर्म पे लड़ो - मरो , जंगल का सबसे बड़ा ये मुद्दा है जंगल उस ओर बढ़ रहा जहाँ नफर...
सबसे प्रेम से रहो, प्रेम जिंदगी बही सुबह निकल गई, बस रात रह गई सबसे प्रेम से रहो, प्रेम जिंदगी बही सुबह निकल गई, बस रात रह गई
बन कर कदम बढ़ाता, वृक्ष साथी हमारा साथ दे जाता...! बन कर कदम बढ़ाता, वृक्ष साथी हमारा साथ दे जाता...!
अपने अधूरे-बिखरे सपनों को अपने हाथों से सजाना चाहती हूँ। अपने अधूरे-बिखरे सपनों को अपने हाथों से सजाना चाहती हूँ।
याद आते ही पुरानी यादें, हृदय में चुभते कांटे याद आते ही पुरानी यादें, हृदय में चुभते कांटे
कोशिश की तमन्ना है, मेहनत का एक वादा है। किसी मंज़िल को पाने का….. कोशिश की तमन्ना है, मेहनत का एक वादा है। किसी मंज़िल को पाने का…..
यह कैसा है मिलन और कैसी जुदाई यह कैसा है मिलन और कैसी जुदाई
किसी मंज़िल को पाने का, अब मन में इरादा है, किसी मंज़िल को पाने का, अब मन में इरादा है,
हर ओर से निराश लोग, सुने राय लगा ले, आप यहां पर ठेला चाय हर ओर से निराश लोग, सुने राय लगा ले, आप यहां पर ठेला चाय
आज गांवों में प्रातः जल्दी जाते है। स्थान विशेष से पीली मिट्टी लाते है।। आज गांवों में प्रातः जल्दी जाते है। स्थान विशेष से पीली मिट्टी लाते है।।
कभी दो छोरों के बीच ही सिमटती ज़िन्दगी। कभी दो छोरों के बीच ही सिमटती ज़िन्दगी।
उनके लिए दीवाली होती, सदा गरीब जो होते स्वार्थी, एकाकीपन का गीत उनके लिए दीवाली होती, सदा गरीब जो होते स्वार्थी, एकाकीपन का गीत
खास कानून की मजबूत होती कोई बेंत। हमारे स्वार्थ की बलि न चढ़ता, बेचारा पेड़। खास कानून की मजबूत होती कोई बेंत। हमारे स्वार्थ की बलि न चढ़ता, बेचारा पेड़।
थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है, साखी सोच ज्यादा के चक्कर मे हुई, बहुतों की मौत थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है, साखी सोच ज्यादा के चक्कर मे हुई, बहुतों की मौत