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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

इश्क का मोहताज़

इश्क का मोहताज़

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दिल तडप रहा है तेरे मधुर मिलन के लिये,
हरपल खड़ा रहता हूंँ मै तेरे इंतजार के लिये।

मन बावरा बन रहा है तेरे इस्तकबाल के लिये,
इजहार कर रहा हूंँ मै एहसास कराने के लिये।

ख्वाबों का यह महल बनाया है मैने तेरे लिये,
मुरादों की वजिरात मै पेश करुंंगा तेरे लिये।

सितारों की ये महफिल सजाई है मैने तेरे लिये,
दिल तरसता है तेरी बांहोंमें सिमटने के लिये।

खुदा मेहरबान बन गया है हमारे इश्क के लिये,
'मुरली' मोहताज है तेरे दिल में बसने के लिये।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ - गुजरात)


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