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Bhavna Thaker

Tragedy

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Bhavna Thaker

Tragedy

इंसान मत कर गुरुर

इंसान मत कर गुरुर

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गुरुर का सुरूर इतना भी अच्छा नहीं जनाब

ज़िंदगी की कोशिश बहुत सख़्त है हमें गिराने की। 


चुटकी मिट्टी की अहमियत को बड़ी समझो पैर ज़मीन से

टिकाए रखो तो किसी में हिम्मत नहीं तुम्हें मिटाने की।


क्यूँ राय भर जाती है दिमाग की संदूक में पल भर के

बाद का भी जब हमें इल्म नहीं क्या होने वाला है।


सरमाया साथ नहीं जाएगा चंद यादें सद्विचारों की रह जाएगी

धरा पर कहीं ना कहीं बांटी जो होगी अपनेपन की नमी। 


गुमान की कगार पर खड़े कामयाबी का जश्न मनाते क्यूँ फ़ितरत रही

नासमझ इंसानों की एक दूसरे को सताने की। 


कच्ची मिट्टी के घड़े सी है ज़िंदगी कब वक्त की आँधी पिघला देगी

कोई नहीं जानता फिर क्यूँ नज़र ऐसी रखें

सबको एक पायदान नीचे देखने की।


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