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Kunda Shamkuwar

Abstract Romance Others

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Kunda Shamkuwar

Abstract Romance Others

इल्यूज़न

इल्यूज़न

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तुम हमेशा बस प्रेम की ही बातें करते थे तुम भी आशावादी थे... 

हर आशावादी प्रेमी की तरह....

तुम्हें दुनिया खूबसूरत लगती थी

क्योंकि तुम प्रेम में थे...

तुम्हें हर ओर प्रेम नज़र आता था...

हर व्यक्ति में प्रेम दिखता था...

लेकिन हक़ीक़त तो मुख़्तलिफ़ होती है

तुम मुझे प्रैक्टिकल वुमन कहते रहते थे  

यह तुम्हारी डिप्लोमेसी थी

क्योंकि तुम्हें शायद मुझे निराशावादी कहना होता था...


ऐसा नहीं की मैं प्रेम में नहीं थी.... 

लेकिन जिंदगी सिर्फ़ प्रेम से नहीं चलती है....

कई सारी चीजों की दरकार होती है..

समाज की रजामंदी....

क्योंकि जब तब वह अपनी ताकत का अहसास कराता है...

समाज की इसी सोच में मुझे प्रेम भी खेत की खरपतवार ही लगता था....

जिसे बस निकालकर फ़ेंकना होता है....

कभी प्रेमी जोड़े को समाज भी टारगेट करने लगता है...

कभी रवायतों के नाम पर....

कभी संस्कृति के नाम पर....

तो कभी देश के गौरव के नाम पर....


समाज फिर देश के गौरव को बचाने निकल पड़ता है....

संस्कृति के नाम पर वह प्रेमी जोड़े को मारने का फरमान जारी करता है....

और प्रेमी जोड़े कोर्ट में जाकर सिक्योरिटी माँगते है....

प्रेम के मौलिक अधिकार होने से उन्हें सिक्योरिटी मिलती है.....


लेकिन मुझ जैसी प्रैक्टिकल लड़की समाज की ताकत जानती है... 

और तुम जैसे आशावादी प्रेमी कोर्ट वाले न्याय की ताकत को मानते है...

कुछ दिनों के बाद खरपतवार को नोच कर फेंक दिया जाता है....

अख़बारों में किसी पन्ने में फिर प्रेमी युगल की निघ्रुण हत्या की ख़बर होती है...

 

तुम हमेशा बस प्रेम की ही बातें करते थे...

क्योंकि तुम आशावादी थे... 

मैं प्रैक्टिकल वुमन थी....

क्योंकि मैं समाज की ताकत जानती थी...



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