तुम मिले
तुम मिले
अगर तुम होते तो ये होता…
अगर तुम होते तो वो होता…
सारी ख़्वाबों ख़यालात की बातें थी
तुम मिले…
सच में मेरी दुनिया तुमने जैसे बदल ही दी…
वे कुछ दिन तो यूँ निकल गये…
कुछ मैं नयी थी…
कुछ तुम नये थे…
और एकदूसरे को एक्स्प्लोर करते हुए वे नये नये दिन और नयी नयी रातें कब निकल गयी पता ही नहीं चला…
मैं?
नई नवेली…
नया घर…
नया परिवार…
नया शहर…
अनजान चेहरें…
इन सबके बीच मैं कहाँ थी?
मेरी चॉइस?
यह भला किस चिड़िया का नाम हैं…
हक़ीक़तन में मुझे कुछ दिनों के बाद लगने लगा की ये तो मेरा कोई नया मालिक नमूदार हुआ हैं…
उसे यह पसंद हैं तो आज यह बनाएँगे…
यह नहीं पसंद तो नहीं बनाएँगे…
घर की बहू हो तुम तो कपड़ों का ध्यान रखा करों…
नौकरी तो ना ही करो तुम
क्योंकि मैं हमारे गुज़ारे लायक कमाता हूँ…
और बच्चों का क्या होगा?
कौन देखेगा उन्हे?
कुछ जेवर तो तुम्हें पहनना ही होगा…
क्योंकि हम ग़रीब तो बिल्कुल भी नहीं हैं…
सोसाइटी में हमारी भी कोई इज़्ज़त हैं…
न जाने कितनी बातें थी…
लेकिन वे सारी बातें इशारों से और कई बार शुगर कोटेड वर्ड्स में कहीं जाती थी…
अगर कभी मैं कुछ बोलती किसी बात के एतराज़ के तौर पर
तब तुम शांत रहो
हम हैं ना, तुम्हें चिंता करने की जरूरत नही हैं
अक्सर कॉलेज के डिबेट्स जीतनेवाली मैं यकायक शांत हो जाती…
सच में मुझे कॉलेज डिबेट्स तो जैसे काग़ज़ी लगते…
ऑन पेपर बस…
क्योंकि उन मुद्दों की वैल्यू हक़ीक़त में एकदम ज़ीरो रहती
बेकार और फालतू मुद्दें…
घरों में जीतनेवाला अमूमन हमेशा मर्द होता हैं
कभी कभी मैं सोचने लगती हूँ की अगर तुम ना होते तो क्या होता?
सच कहुँ तो बहुत कुछ होता…
जैसे की मेरी आज़ादी…
क्योंकि तुम मेरे नाम से जानी जाती हो…
तुमने ये करना होगा और वो नहीं करना होगा
तुम घर के बाहर जाओगी तो मुझे बताकर जाओगी
इस फ़रमान पर मेरे एतराज़ पर फिर से वही वाली बात की आय लव यू…मैं तुम्हारी केयर करता हूँ…
कितनी ही बातें हैं…
कितने ही किस्से हैं…
कुछ लोग कहते हैं की समर्पण में क्या तेरा क्या मेरा?
समर्पण में अलग अलग तरीक़ों से आदमी और औरत ग्रो करते हैं…
सही हो सकता हैं…
बशर्ते रोक टोक का टंटा न हो…
लेकिन घर हैं तो बर्तन खड़केंगें ही न?
यह लॉजिक देकर शांत किया जाता हैं…
हर बार…
बार बार…
और तुम पढ़ीलिखी हो न?
पढ़ीलिखी मैं फिर से शांत हो जाती हूँ…
एक बार फिर मन ही मन मुझे कन्फर्म हो जाता हैं की तुमसे मिलने के बाद वह चुलबुली लड़की जाने कैसे कहाँ कहीं खो गयी हैं…
