Bhoop Singh Bharti
Classics
माथै बिंदी बोरला, पायल की झणकार।
पाणी ल्याणे चाल दी, हरयाणे की नार।
हरयाणे की नार, हार पहरा नौ लड़ का।
मटका धर पणहार, माररी झोला कड़ का।
घूंघट की फटकार, उड़ादे सभकी निंदी।
कर सौला सिंगार, चली ला माथै बिंदी।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
दाग गुलामी के उनके लहू से मिटे, आजादी की कीमत हमने है चुकाई, दाग गुलामी के उनके लहू से मिटे, आजादी की कीमत हमने है चुकाई,
नख से निकली भगवान विष्णु के ब्रम्हा के कमण्डल ने समाहित किया। नख से निकली भगवान विष्णु के ब्रम्हा के कमण्डल ने समाहित किया।
जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श। जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श।
आत्मैक्य सहचारिता सुखद अहसास आत्मैक्य सहचारिता सुखद अहसास
बोता है प्यार तो बस प्यार का ही संसार, बिनप्यार जिन्दगी, नीरस, अधूरी, बेकरार। बोता है प्यार तो बस प्यार का ही संसार, बिनप्यार जिन्दगी, नीरस, अधूरी, बेकरार...
साथ में मगर इंद्रधनुष से हम बिखेरते सुंदर रंग चारों तरफ। साथ में मगर इंद्रधनुष से हम बिखेरते सुंदर रंग चारों तरफ।
हे उद्धव क्या मुझे समझाएं ज्ञान की बातें काहे बतलाएं। हे उद्धव क्या मुझे समझाएं ज्ञान की बातें काहे बतलाएं।
ये पांव घायल हुए और आहत - सा है मन ! दास्तां अपने दिलों की क्या बताएं आपको! ये पांव घायल हुए और आहत - सा है मन ! दास्तां अपने दिलों की क्या बताएं आपको!
बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।। बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।।
विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन। विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन।
स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार। स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार।
सोच ही जीवन में मन की रहती है जीवन जीते धन के साथ भाव रहते हैं। सोच ही जीवन में मन की रहती है जीवन जीते धन के साथ भाव रहते हैं।
तिल-तिल कर तपती धरा, जलती है दिन-रात। तिल-तिल कर तपती धरा, जलती है दिन-रात।
हमें खतरा है महलों के उन सुनसान रास्तों से। जहां फैला है सन्नाटा बहां कम लोग रहते हैं। हमें खतरा है महलों के उन सुनसान रास्तों से। जहां फैला है सन्नाटा बहां कम लोग ...
शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित। शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित।
चौदह वर्षों का विरहवास हृदय भरा विषाद था। चौदह वर्षों का विरहवास हृदय भरा विषाद था।
ना आए कभी ऐसा वक़्त कि ईमान गिर पड़े। ना आए कभी ऐसा वक़्त कि ईमान गिर पड़े।
आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान ! आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान !
तुमने ही अर्जुन को सारथी बन राह दिखलाई है विश्व को महाभारत की सच्चाई दिखलाई है। तुमने ही अर्जुन को सारथी बन राह दिखलाई है विश्व को महाभारत की सच्चाई दिखलाई ...
नहीं बिलखना चाहिए इस दौर में अब, हमारे कर्म मुक्ति का एक द्वार खोलते हैं ! नहीं बिलखना चाहिए इस दौर में अब, हमारे कर्म मुक्ति का एक द्वार खोलते हैं !