हरियाले सावन से एक मुलाक़ात
हरियाले सावन से एक मुलाक़ात
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
ऐ सावन ! इतना तो बरस जाया कर
कि धरा पर बहने लगे तीव्र जलधार !
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
तैरा सकूँ मैं मिलकर जिसमें अपनी
कागज की सुन्दर सुन्दर छोटी नाव !
नाचे जहाँ बच्चों की मस्ती भरी टोली
और जहाँ मेरे संग मिल झूमे सारा गाँव।
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
मेघा तुम तो बरसाते हो पानी धारासार
अबके बरस तो बस दे रहे हो फुहार ?
ऐसा ना कर ओ बदरा झुमके बरस जा
कमनीय गात भीगा लूँ मैं अलबेली नार!
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
उदास होकर जो सावन मुझसे बोला,
नम आँखें ले उसने अपना मुख खोला!
प्रिय व्यथित है मेरा भी मन सून लो ना,
अब पेड़ कम हो रहे और है धरती सूना !
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
मेरे बादलों का मन है अब भरमाया।
जाने कहाँ से नभ में बारूद भर आया!
पेड़ कटैयों का दुष्टों का दल है आया
प्राकृतिक संसाधनों को तोड़ खाया !
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
वो सोख रहे हैं मेरे बादलों का आधार,
कहो कहाँ से लाऊँ मैं अनहद जलधार ?
फिर सावन बोला चेहरे पर हँसी लाकर,
सुनो, जरा अब मन से ध्यान लगाकर !
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
तुम्हारे युग में तो अब फॉग ही चलेगा ,
डिजिटल वर्ल्ड में,कागज कहाँ मिलेगा?
बड़ी अच्छी रही सावन से मुलाक़ात,
की ज़ब मैंने हरियाले सावन से बात !
भीगे हुए हैं पेड़ पौधे जंगल व पात,
खोल कर रख दिये मैंने सारे जज्बात,
सिमित वर्षा अब प्रकृति का उपहार,
जो डिजिटल फुहार को किया स्वीकार !

