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Satish Chandra Pandey

Romance

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Satish Chandra Pandey

Romance

ना जाने वो पल कैसे थे

ना जाने वो पल कैसे थे

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तू मुस्काया

मैं रो दी थी,

तू घर आया

मैं बाहर थी,


ना जाने वो पल कैसे थे,

राहों में मिले अचानक हम,

मैं शर्मायी

तेरी होकर,


तू मुस्काया मेरा होकर

तब से तू मेरा

मैं तेरी,

फिर भी मिलने में

है देरी।


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