होली
होली
राधा के संग श्याम भी,
खेल रहे देखो होली।
आपस में इक रंग डाले,
आती मिलकर जब टोली।
रंग पक्का था प्यार का,
बेशक शरीर होते दो,
पूरे जगत में नाम है,
कहके गये जगत में वो।
नहीं कभी वो होते थे,
सारा जगत है जानता,
अमिट प्यार है राधा का,
हर जन यही है मानता।
रंगों के बड़े पर्व पर,
सभी बांटते मिलके दर्द,
गर्मी आये या बसंत,
या चलती हो हवा सर्द।
