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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

हमकौ अबि पूंछत नाहिं.

हमकौ अबि पूंछत नाहिं.

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हमकौ अबि पूंछत नाहिं,

तेरो अब कछु मतलब नाहिं,

भूल जईऔ अबि हमहि को,

जब प्यार को समझै नाहिं।

तुमसे अबि न कहिहौं कबहूं,

मेरे प्यार की धुन सुनिहौं कबहूं,

जा तोय हम दुआ करिहैं प्रभु,

होय न दुख पीड़ा तोय कबहूं।

हमारो प्यार सच्चो होईये तौ मिलैगें,

ऐसो अब नाहिं सोचौं जो हम मिलैंगे।

प्यार पाने होत जिसै वौ छोड़ै नाय,

सच्चो प्यार कबहूं बिछड़त नाय।



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