STORYMIRROR

हकीकत

हकीकत

1 min
351


तू है फिर भी तू नहीं,

मैं हूँ फिर भी मैं नहीं,


यही हकीकत है जिंदगी की

और कुछ नहीं।


बस हकीकत इतनी जान जाना,

पाना तो है जिद अभी।


और जो पा लिया फिर,

तू कुछ नहीं और मैं कुछ नहीं।


यही हकीकत है ...कुछ नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama