STORYMIRROR

हकीकत

हकीकत

1 min
350


तू है फिर भी तू नहीं,

मैं हूँ फिर भी मैं नहीं,


यही हकीकत है जिंदगी की

और कुछ नहीं।


बस हकीकत इतनी जान जाना,

पाना तो है जिद अभी।


और जो पा लिया फिर,

तू कुछ नहीं और मैं कुछ नहीं।


यही हकीकत है ...कुछ नहीं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama