Karishma Gupta
Abstract Fantasy
केवल संवाद से नहीं बनती स्मृतियां
ये जाना मैंने
जब रही तुम्हारे मौन में साथ
महसूस करना तुम्हें
तुम्हारी अनुपस्थिति में भी
सफ़र करना नहीं किन्तु
कहीं ठहर जाना साथ तुम्हारे
एक सुखद स्मृति जैसा है
स्मृतियां
एक उम्मीद
यात्रा
सफ़र
चक्रवात
वो बस जी रहे ...
**......**
"बदलाव"
बेवजह
संघर्ष
यह कैसा वायरस कहर बनकर बरसा है हर जगह मच गया है यह कैसा हाहाकार थम गई जैसे अब दुनिया यह कैसा वायरस कहर बनकर बरसा है हर जगह मच गया है यह कैसा हाहाकार थम गई जैसे...
हम सब वो शक्तिमान हैं। कि हम सब वो शक्तिमान हैं। हम सब वो शक्तिमान हैं। कि हम सब वो शक्तिमान हैं।
तभी कोरोना मात खायेगा तभी मानव बच पायेगा वीर तुम लड़ते रहो ! धीर तुम बढ़ते रहो ! तभी कोरोना मात खायेगा तभी मानव बच पायेगा वीर तुम लड़ते रहो ! धीर तुम बढ़ते रहो ...
मेरी आखरी घड़ी हो मैं मुन्तजिर ना रह जाऊं। मेरी आखरी घड़ी हो मैं मुन्तजिर ना रह जाऊं।
वरना कोई न रोक पाएगा होने से पूरे संसार का विध्वंस भी। वरना कोई न रोक पाएगा होने से पूरे संसार का विध्वंस भी।
जो हमारा जीवन बचाता है जीवन रक्षक वह कहलाता है। जो हमारा जीवन बचाता है जीवन रक्षक वह कहलाता है।
कुछ दिन अब तुम मौन हो जाओ मैं साँसें लूँ बस चुप हो जाओ। कुछ दिन अब तुम मौन हो जाओ मैं साँसें लूँ बस चुप हो जाओ।
इस दुनिया को जीत ले तू क्योंकि लड़की है तू। इस दुनिया को जीत ले तू क्योंकि लड़की है तू।
ईश्वर की उस अनुपम कृति से हाँ मिल लो न स्वयं से। ईश्वर की उस अनुपम कृति से हाँ मिल लो न स्वयं से।
उद्देश्य भविष्य का निर्माण, सत्कार हम है भारत वासी हमारी खाज़ पहचान। उद्देश्य भविष्य का निर्माण, सत्कार हम है भारत वासी हमारी खाज़ पहचान।
घर से बाहर नहीं जाना है कोरोना को हारना है। घर से बाहर नहीं जाना है कोरोना को हारना है।
स्वाभिमान प्यार परिवरिश का दामन, आँचल की मर्यादा मान। स्वाभिमान प्यार परिवरिश का दामन, आँचल की मर्यादा मान।
बहुत दिनों के बाद मिले घर के दरो-दीवार से संसार के सबसे सुंदर आशियाने से बहुत दिनों के बाद मिले घर के दरो-दीवार से संसार के सबसे सुंदर आशियाने से
झेल लो अब अकेलेपन को मेरे यारो, क्यों कि ये घड़ी है इन्तजार की। झेल लो अब अकेलेपन को मेरे यारो, क्यों कि ये घड़ी है इन्तजार की।
तुझे पता है, तेरे नाम के कितने गीत गाए जाते है। तुझे पता है, तेरे नाम के कितने गीत गाए जाते है।
बेवजह मौत का मुख चूमते हो अरे पागल, क्यों बाहर घूमते हो। बेवजह मौत का मुख चूमते हो अरे पागल, क्यों बाहर घूमते हो।
भेद भाव नहीं आदमी इन्सान का पथ भ्रष्ट भ्रष्टाचार नशा ! भेद भाव नहीं आदमी इन्सान का पथ भ्रष्ट भ्रष्टाचार नशा !
तुमने ऐसा कुछ बनाया, भई मैं तो हो गया तेरा दिवाना। तुमने ऐसा कुछ बनाया, भई मैं तो हो गया तेरा दिवाना।
दिल में है जिसका वतन का प्यार, ईश्वर का आशीर्वाद है उनपर बरकरार। दिल में है जिसका वतन का प्यार, ईश्वर का आशीर्वाद है उनपर बरकरार।
तुमने तो बस पेड़ काटे, यहां परिंदो का शहर उजड़ गया। तुमने तो बस पेड़ काटे, यहां परिंदो का शहर उजड़ गया।