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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Thriller

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Thriller

हिसाब

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देख लो वक़्त तकाजा है

हर दुश्मन का जनाजा है..

मौत से बदतर होगी दुश्मनों की कहानी,

ऐसी होगी दिल में खौफ की निशानी..

मेरे दुश्मनों अब खबरदार हो जाओ,

ज़िन्दा हूँ मैं रण में तैयार हो जाओ...

हर दर्द का हिसाब होगा,

मोहब्बत का नाम होगा..

घायल दिल से जो यूँ टकराया है,

वो जमींदोज होकर मात पाया है..

जिंदगी का फलसफ़ा याद रख,

मोहब्बत के दुश्मन खाक पर..


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