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Dr.Narendra kumar verma

Fantasy

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Dr.Narendra kumar verma

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हिन्दू है हम संस्कृति पहचान है

हिन्दू है हम संस्कृति पहचान है

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हिन्दू है हम, संस्कृति हमारी पहचान हैं !


हिंदू है हम ,संस्कृति हमारी पहचान है,

भारत का जो गौरव बढ़ाएं,और देश का अभिमान है,

नृत्य -कला -संस्कृति की बहती ऐसी रसधार है,

विद्या और स्फूर्ति से जगमग किया आधार है,

हिन्दू है हम, संस्कृति हमारी पहचान है !


सूर्य देते हैं दस्तक पहले, प्रकृति का वर्णन करने को,

जगमगाता है नभ, पक्षियों के मधुर गुंजन को,

बहती सरिता नदियों का पानी ,नित कलरव करने को,

मिट्टी की खुशबू फैली कण-कण में उल्लास भरने को !

हिंदू है हम ,संस्कृति हमारी पहचान है, 

जहां कर्म और न्याय का परम होता अनुशासन है,

तीज-त्योहारों और उत्सवों का देखो सत्कार है,

गर्व करते हैं हम धर्म पर, अनूठी हमारी पहचान है !


संतों की भूमि है यह, तप जिसका आधार है,

वेद-पुराण की महिमा है हम,यज्ञों से जिता संसार हैं, 

राम और कृष्ण की धारा से, महकती अमृत धार है,

वचन पुरुषार्थ पथ पर, महापुरुषों की ख्याति है,

हिंदू है हम ,संस्कृति हमारी पहचान है !


सुख -दुख के साथी हैं हम ,करुणा हमारी पहचान है, 

शिव बसे हैं कण-कण में, मन में हमारे राम है, 

पूजन है नदियां और पर्वत ,जहां वंदनीय प्रकाश है,

दीपक जलता है हर पल, बुझे चिराग जलाने को, 

हिंदू है हम,संस्कृति हमारी पहचान है !


परम संस्कृति और वैभव का मान बढ़ाते हैं,

हृदय पथ से, सर्वे भवंतू सुखिन:का भाव जगाते हैं,

विश्व के कल्याण का नित्य गुणगान गाते हैं, 

गर्व से कहें हिंदू हैं हम, संस्कृति हमारी पहचान है !


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