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Surendra kumar singh

Fantasy

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Surendra kumar singh

Fantasy

दुनियादारी

दुनियादारी

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ये तो दुनियादारी की बातें हैं

वरना तुम जितना नहीं होते होते हो

उससे कम नहीं होते।

ये दुनियादारी की बातें है

नववर्ष 

कि तुम्हारे आने में

गिने चुने दिन हैं शेष हैं।

ये दुनियादारी की बातें हैं

कि आओ इस बार 

हमारे इंसानियत के

जादू के रंग में

सराबोर होकर

पहले हम से मिलो

हमारे हो जाओ।

उनसे मिलो

उनके हो जाओ।

सबसे मिलो

सबके हो जाओ।

सबसे कहो 

तुम अपना दायित्व निभाते

तो मेरा होना

भी हर पल महसूस करते।

ये दुनियादारी की बातें हैं 

नववर्ष

तुम्हारे आने का अभिनंदन है

जब कि तुम थे ही।


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