इश्क तो एक इबादत हैं
इश्क तो एक इबादत हैं
इश्क तो एक इबादत जैसा
एक परिक्षा सी लागे
सुमन सुगन्धम गुन्थन वन्दन
चन्दन जैसा मन पागे ॥
शब्द बाँसुरी बजती धुन मेंं प्रेम इबादत सा सोहे ,
रास रचय्या लीला धारी राधे वल्लभ सी मोहे ॥
पद लख कंजनि झाझर झन्झनी
नट नागर सांवर जोहे
प्रेम पियासे खेले नटखट जीत सके कौनो तोहे ॥
छल प्रपंच आत्मा धरोहर सच्चे झूठे सारे वादे ,
वादे सभी इरादे सच्चे
कर्म हेतु मन पे लादे ॥
प्रेम पियारे भेज सन्देसों पठा दिये उद्धव बाँके ,
मूर्त अमूर्त ज्ञान की बातें बघार रहे व्यर्थ हाँके ॥
झुटे नाही नेह के बंधन श्याम सलोने मन राखे ॥
भक्ति भाव पूजन सामग्री सभी व्यर्थ उनके भाखे ॥
तुम ना जानो कहे गोपियाँ वो ब्रम्ह आत्मा हम सारे ,
हिय भीतर वो भीतर हम नयन कपाट बन्द वारे ॥
जोगी हो तुम जोग लियो है प्रेम विरह रस तुमरे भाने ,
गोपी बन के आना उधौ तब जानोगे इसके माने ॥
बंसी धुन उन्माद भर रही जान गये प्रेम सूधो,
नेत्र मूँद प्रणाम कियो पुनि बिसर गये ज्ञान उधो ॥
हरि नारायण करुणाकर तुम ज्ञान ध्यान केभण्डारे ,
कहे यथार्थ हे दीन पियारे तुमको हम तुम हमको प्यारे ॥
