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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy

इश्क तो एक इबादत हैं

इश्क तो एक इबादत हैं

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इश्क तो एक इबादत जैसा 

एक परिक्षा सी लागे

सुमन सुगन्धम गुन्थन वन्दन

 चन्दन जैसा मन पागे ॥ 


शब्द बाँसुरी बजती धुन मेंं प्रेम इबादत सा सोहे , 

रास रचय्या लीला धारी राधे वल्लभ सी मोहे ॥ 


पद लख कंजनि झाझर झन्झनी 

नट नागर सांवर जोहे 

प्रेम पियासे खेले नटखट जीत सके कौनो तोहे ॥ 


छल प्रपंच आत्मा धरोहर सच्चे झूठे सारे वादे , 

वादे सभी इरादे सच्चे

 कर्म हेतु मन पे लादे ॥ 


प्रेम पियारे भेज सन्देसों पठा दिये उद्धव बाँके , 

मूर्त अमूर्त ज्ञान की बातें बघार रहे व्यर्थ हाँके ॥ 


झुटे नाही नेह के बंधन श्याम सलोने मन राखे ॥ 

भक्ति भाव पूजन सामग्री सभी व्यर्थ उनके भाखे ॥ 


तुम ना जानो कहे गोपियाँ वो ब्रम्ह आत्मा हम सारे , 

हिय भीतर वो भीतर हम नयन कपाट बन्द वारे ॥ 


जोगी हो तुम जोग लियो है प्रेम विरह रस तुमरे भाने , 

गोपी बन के आना उधौ तब जानोगे इसके माने ॥ 


बंसी धुन उन्माद भर रही जान गये प्रेम सूधो, 

नेत्र मूँद प्रणाम कियो पुनि बिसर गये ज्ञान उधो ॥ 


हरि नारायण करुणाकर तुम ज्ञान ध्यान केभण्डारे , 

कहे यथार्थ हे दीन पियारे तुमको हम तुम हमको प्यारे ॥ 



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