मुश्किल सुलझा दे!
मुश्किल सुलझा दे!
जो उलझा है, उसे सुलझा दे,
हर मन में आशा का दीप जला दे।
जो बीता हुआ है, उसे याद दिला दे,
भूली-बिसरी बातों को फिर एहसास करा दे।
जो फँसा हुआ है, उसे राह दिखा दे,
मुश्किलों के बंधन पल-पल में ढाल दे।
जो परेशान है, उसे थोड़ा हँसा दे,
उसके सूने जीवन में खुशियाँ बसा दे।
जो रूठा है, उसे प्यार से मना दे,
टूटे रिश्तों को फिर से सजा दे।
जो टूटा है, उसे फिर से बना दे,
बिखरे सपनों को नई उड़ान दे।
जो गिरा है, उसे फिर से चला दे,
घिरे अँधेरों से जीत की राह दिखा दे।
जो अकेला है, उसे अपना बना दे,
उसके जीवन में अपनापन जगा दे।
जो अँधेरों में है, उसे दीप दिखा दे,
निराशा के पथ पर आशा जला दे।
जो डरा हुआ है, उसे हिम्मत दिला दे,
उसके मन में विश्वास का दीप जला दे।
जो भटका हुआ है, उसे मंज़िल मिला दे,
उसके कदमों को सही दिशा दिला दे।
यही तो इंसानियत का सच्चा काम है,
दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाना आराम है।
यही सच्ची पूजा, यही सबसे बड़ा धर्म है,
दूसरों के जीवन में उजाला करना ही मानवता का मर्म है।
