STORYMIRROR

Dr.Narendra kumar verma

Classics Fantasy Inspirational

4  

Dr.Narendra kumar verma

Classics Fantasy Inspirational

स्वतंत्रता के शिखर का प्रतिमान हम बनाएँगे! 🇮🇳

स्वतंत्रता के शिखर का प्रतिमान हम बनाएँगे! 🇮🇳

1 min
11

स्वतंत्र हैं हम, हम यह कर्ज़ चुकाएँगे,
हम मेहनत कर अपना फ़र्ज़ निभाएँगे!
देश और सेनाओं का मान हम बढ़ाएँगे, लहलहाती फ़सलों से धरती की चुनर सजाएँगे!

फ़र्क है कहीं तो साधक को साधन का हक़, 
और बदल रही राहें, तो प्रकाश की लौ जलाएँगे!
गुज़रते लम्हों संग मन चहक-चहक कर, महकती बगिया हम खिलाएँगे!

कोशिश करले ये दुनियां, चाहकर भी,
एक तिनका भी हमें बेज़ार न कर पाएंगी !
बिखरे हुए कतरो को जोड़कर, एक ऐसा हिंदुस्तान हम बनाएंगे !

उमड़ती लहरों से डरना कैसा,
देश में अपनत्व की झलक हम दिखाएँगे! आँधी-तूफ़ानों के जलज़लों को समेटकर, स्वतंत्रता के शिखर का प्रतिमान हम बनाएँगे! 🇮🇳 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics