STORYMIRROR

Ritu Agrawal

Tragedy

2  

Ritu Agrawal

Tragedy

हिजरत(पलायन)

हिजरत(पलायन)

1 min
177

हुक्मरानों से है मेरी, बस इतनी ही शिकायत।

क्यों कर रहे मजलूम, आपके शहर से हिजरत?

नहीं है गरीबों को, तख्त-ओ-ताज़ से मोहब्बत।

यूँ मत करो अपने ही हमजादों से तुम अदावत।

उन्हें चाहिए दो जून की रोटी संग एक अदद छत।

ये मौलिक अधिकार देकर, बढ़ाओ उनकी इज्ज़त।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy