Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Sunil Gajjani

Classics


4  

Sunil Gajjani

Classics


गज़ल

गज़ल

1 min 216 1 min 216

ज़िन्दा रहूँ हर दौर में इतनी तमन्ना हैं 

गांधी-सा होऊ, वो जज़्बा किससे उधार लूँ !


ज़िंदगी बेहद तंग गलियों से गुजरी है 

कुम्लायी गलिया, धूप कहाँ से उधार लूँ !


ख्वाबों की बस उम्र, बदलती ख्वाब नहीं 

ख्वाब बाकी, पर ज़िंदगी कैसे उधार लूँ !


बेवजह अब मुस्कुराया नहीं जाता 

मुस्कुराहटें भला कब तक उधार लूँ ! 


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sunil Gajjani

Similar hindi poem from Classics