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Sunil Gajjani

Classics

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Sunil Gajjani

Classics

गज़ल

गज़ल

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ज़िन्दा रहूँ हर दौर में इतनी तमन्ना हैं 

गांधी-सा होऊ, वो जज़्बा किससे उधार लूँ !


ज़िंदगी बेहद तंग गलियों से गुजरी है 

कुम्लायी गलिया, धूप कहाँ से उधार लूँ !


ख्वाबों की बस उम्र, बदलती ख्वाब नहीं 

ख्वाब बाकी, पर ज़िंदगी कैसे उधार लूँ !


बेवजह अब मुस्कुराया नहीं जाता 

मुस्कुराहटें भला कब तक उधार लूँ ! 


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