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Sunil Gajjani

Romance


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Sunil Gajjani

Romance


कविता

कविता

1 min 211 1 min 211

जब भी स्मृतियों में आऊ, मुझे सुनना मत कुछ पढ़ लेना

हर कवि की प्रेम कविताओं में हूँ बस मर्म वो समझ लेना !


प्रेम मर्यादित, अपरिभाषित,प्रेम सागर-सा ,पर्वत-सा भी 

प्रेम की पीड़ा प्रेम ही जाने प्रेम एक विश्वास समझ लेना !


दूरिया भूगोल में है मन तो कहें तेरे मेरे प्रीत की कथा 

रोम-रोम देह मे तुम, रचे-बसे एक एहसास की तरह !


व्यक्त क्या करूँ या करूँ कुछ अपने प्रेम का नामकरण 

अंतस प्रेम प्रिय मेरा ,हो तुम मेरी सांस, अरदास की तरह !.



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