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Sunil Gajjani

Romance


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Sunil Gajjani

Romance


कविता

कविता

1 min 110 1 min 110

विश्वास नहीं

पीड़ा बहुत है


ह्रदय में मेरे

तुम्हारी स्मृतियों की


निर्जल पलके देख यूँ

दोष ना दो

सुनो, फिर सागर को

तुम क्या कहोगी


जिसके भीतर

कई सैलाब दफ़न है !


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