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Govardhan Bisen 'Gokul'

Abstract

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Govardhan Bisen 'Gokul'

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ग्रीष्म ताप

ग्रीष्म ताप

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कलाधर छंद (वार्णिक)

(चंचला छंद चामर छंद)


सूर्य ताप में अतीव, लोग हो रहे अधीर,

ग्रीष्म ताप से विपन्न, जीव जंतु काँपते।।१।।


कीर तीतरी बटेर, चील मोर जो विहंग,

वन्य जीव बाघ शेर, पेड़ छाँव नाँपते।।२।।


गाय बैल भी निढाल, गर्म भाप की उछाल, 

घास नष्ट देख हाल, जीव पूर्ण हाँपते।।३।।


हांफ हांफ गाँव गांव, ढूँढते सभी सुछाँव

ताप से करे बचाँव, ठंड नीर भाँपते।।४।।



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