महिला शक्ति
महिला शक्ति
(गोकुल छंद)
मात्रा भार: ८+८+८+६ = ३० (यति: ८, १६, २४ और ३० मात्राओपर,
बंद: ४ पंक्तियों का
तुकांत: पहिली-दुसरी, तिसरी-चौथी पंक्ती में या चारो पंक्तियों में.
चरणांत: गागागा, ललगागा, ललललगा, गाललगा.
शक्ति स्वरूपा, आदि भवानी, जग की पावन, रानी है |
वेदों ने भी, महिमा गाई, ईश रूप वर, दानी है ||
गार्गी मैत्री, ज्ञानी धारा, विद्वत्ता की, थाती है |
ऋषियों ने भी, शीश नवाया, जग की सुंदर, माती है ||१||
लक्ष्मीबाई, बनी कालिका, रणचंडी का, रूप लिया |
दुर्गावति अरु, झलकारी ने, गौरव का ही, दीप दिया ||
चेन्नम्मा ने, आन न छोड़ी, शत्रु अधम को, धूल चटा |
मातृभूमि की, लाज बचाने, चमकी बन वह, तेज घटा ||२||
ममता मुर्ती, करुणा सागर, घर को सुरपुर, बनवाती |
त्याग तपस्या, सहती पीड़ा, स्नेह सुधा भी, बरसाती ||
बेटी बनकर, रोशन आँगन, कुल को ऊँचा, करती है |
माता बनकर, बच्चों में वह, संस्कारों को, भरती है ||३||
राजकाज में, चतुर बुद्धि है, शासन की अब, शान बड़ी |
नभ से लेकर, थल तक साहस, गूँज रही अब, तान खड़ी ||
ज्ञान क्षेत्र हो, या खेलों में, नारी का ही, परचम है |
अन्यायों से, लड़ती निर्भय, शौर्य प्रेम का, संगम है ||४||
आज दिवस है, पावन इनका, भेदभाव को, दूर करो |
नारी को अब, वंदन करके, जग का सारा, कष्ट हरो ||
'गोकुल' बोले, मन में गढ़लो, नारी ही तो, रूप-भली |
श्रद्धा अर्पण, नमन भाव से, खिलती सुख की, पुष्प-कली ||५||
✍️ गोवर्धन बिसेन ‘गोकुल’
गोंदिया,
मो. नं. ९४२२८३२९४१
दि. ८ मार्च २०२६
