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usha yadav

Abstract


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usha yadav

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उदास नहीं अब

उदास नहीं अब

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उदास नहीं हूँ मैं

तेरे ना होने का इंतजार भी 

नही है पर अब उदास नहीं हूं मैं


 मैं खुश हूं अपने आप में

अपने इस माहौल में क्योंकि 

अब उदास नहीं हूं में.


कठिन ही सही है तुझे भुलाना पर 

तुझे भूला चुकी हूं में क्योंकि 

अब उदास नहीं हूँ में


तलाश तेरी अब भी जारी सी 

लगती है, पर तेरे रास्तो को 

भूलाना सीख चूकीं हू मे

  क्योंकि उदास नहीं हूं मैं


पल पल हर बार तुझे सोचती रही मे, 

कभी इधर कभी उधर ढूंढती

 रही मे मगर अब उदास नहीं मैं.


सब कुछ जान कर भी 

अनजान सी बनी रही मैं 

क्योंकि अब उदास नही हूँ मैं।


तुझसे हार कर भी जैसे जीत गई मैं 

क्योंकि अब उदास नहीं हूँ में।


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