मुझे समझना आसान नहीं
मुझे समझना आसान नहीं
1 min
355
मुझे समझना आसान नहीं
क्योंकि कभी शब्दों के गूढ़ अर्थों
में छिपी एक कहानी सी
हूँ मैं…….
तो कभी वृक्षों की टहनियों में
कलरव करते पक्षियों की
चहचहाती हुई अजनबी सी
ध्वनियों सी हूं मैं
कभी नव-यौवन सी बालिका
की मधुर मुस्कान में छपी
उसकी अल्हड़ प्रेम कहानी सी हूँ
तो कभी प्रेम में लिखी गई
उन कहानियों की नायिका सी
हूँ तो कभी उनके गमों में छिपी
उनकी विरह वेदना सी हूं मैं
मुझे नहीं पता क्या हूं मैं?
मैं तो खुली किताब के उन
पन्नों की गहराइयों सी हूँ
जिसे समझना आसान नहीं!
