बेचैन सी
बेचैन सी
1 min
306
आजकल बेचैन सी रहती हूं
ना ही रोती हूं और ना ही चिल्लाती हूं
क्योंकि अब मैं टूटना नहीं
खुद में पिघलना चाहती हूं
कभी मिल ओ जिंदगी तू मुझे
तो तुझे बताना चाहती हूं
क्या क्या छिना है तू ने
उसका हिसाब लेना चाहती हूं
कैसे तूने मुझे तोड़ा है
एक के बाद एक करके
बस! अब मैं टूटना नहीं
खुद में सिमटना चाहती हूं
क्योंकि आजकल बहुत
बेचैन सी रहती हूं।
