STORYMIRROR

अमित प्रेमशंकर

Tragedy

3  

अमित प्रेमशंकर

Tragedy

ग़म साथ तो तेरे है ना

ग़म साथ तो तेरे है ना

1 min
294

अब याद दिला न उसकी तू

है धरती, गगन है, रैना।

कितने वर्ष से बरस रहे हैं

मेरे प्यारे नैना।


उसे वफ़ा कहूं की हरजाई

पूछे मुझसे मेरी परछाई।

कैसे कह दूं बेवफा उसे

जो इस हालत तक ले आई।


फिर कहती है पुरवाई पवन

अब बनके प्यारी मैना

छोड़ा उसने है हाथ तेरा 

"ग़म" साथ तो तेरे है ना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy