End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Aditya Srivastav

Classics


3  

Aditya Srivastav

Classics


ग्लोबल विपदा

ग्लोबल विपदा

1 min 206 1 min 206

मिलते थे गले गर्मजोशी से जो

आज कतराते हैं हाथ मिलाने से

दिखता नहीं है आँखों से पर

फैले है गले लगाने से,

पसरा सन्नाटा सड़कों पर


बंद वाहनों के करकस हॉर्न क्यूँ हैं !

क्यों पड़ा है मानव घर पर में

ख़ाली सड़कें शमशान क्यूँ है !


धमकाते थे परमाणु से जो

डरके पड़े हैं सूक्ष्म विषाणु से

है पृथ्वी आज सूनसान पड़ी,

क्या चीन के काले जादु से ?


विकास की बंदरबांट में इस

अर्थव्यवस्था में आई ढ़लान क्यूँ है !

बैठे थे सिंहासन पे विश्वपटल के

वो मोदी-ट्रम्प परेशान क्यूँ हैं ?


Rate this content
Log in

More hindi poem from Aditya Srivastav

Similar hindi poem from Classics