Aditya Srivastav
Abstract
कब तक सुनता रहूँ मैं उनकी
होते जो अक़्सर साथ मेरे !
कब तक मैं उनका दिल रखूँ
खुद मेरा दिल भी पास मेरे !
दिल मेरा शहद का प्याला हाँ
कड़वे हैं पर अल्फाज़ मेरे !
पापा
नज़्म, गजल,शाय...
चाय की एक चुस...
भीड़ में तन्हा
दिल की बात
एहसास-ए-दिल
कलयुगी मानव
ग्लोबल विपदा
चाँद चमक जाता...
एक सैनिक की क...
पूछता फिरता हूँ पता खुद ही से खुद का धोबी का कुत्ता हूँ मैं घर का ना घाट का ।। पूछता फिरता हूँ पता खुद ही से खुद का धोबी का कुत्ता हूँ मैं घर का ना घाट का ...
यहाँ सच के आगे झूठ की दादागिरी नहीं चलती। यहाँ सच के आगे झूठ की दादागिरी नहीं चलती।
यादों के सुर्ख रंग रंग देते हैं बड़े सुंदर रंगों से। यादों के सुर्ख रंग रंग देते हैं बड़े सुंदर रंगों से।
मुश्किल समय, दोस्त साथ खड़ा होता, आपसी सहयोग से, हर शय सरल होता। मुश्किल समय, दोस्त साथ खड़ा होता, आपसी सहयोग से, हर शय सरल होता।
वो हमें ठीक से परख लेते तो कभी, वो हमें ठीक से परख लेते तो कभी,
जिंदगी हो या गणित यह तो क्रम जिंदगी का ऐसे ही चलता है। जिंदगी हो या गणित यह तो क्रम जिंदगी का ऐसे ही चलता है।
उनके मन, वचन, कर्म में नहीं दिखे लोकतंत्र के प्रति सम्मान उनके मन, वचन, कर्म में नहीं दिखे लोकतंत्र के प्रति सम्मान
तुझे कतरा-कतरा याद कर अश्क पीते जा रहे हैं। तुझे कतरा-कतरा याद कर अश्क पीते जा रहे हैं।
बदनामियां बचाए हुए तो हैं। नज़रों को झुकाए हुए तो है।। बदनामियां बचाए हुए तो हैं। नज़रों को झुकाए हुए तो है।।
औरों के कष्ट मिटाकर खुद कष्ट उठाए नेकी करके भी बदनामी ही पाए औरों के कष्ट मिटाकर खुद कष्ट उठाए नेकी करके भी बदनामी ही पाए
इक दूजे पे है विश्वास जिंदा है प्रेम जीवन की साँस। इक दूजे पे है विश्वास जिंदा है प्रेम जीवन की साँस।
किसी का पेट भर कर जो खुद भूखा रह जाए , किसी का पेट भर कर जो खुद भूखा रह जाए ,
मधुर मुस्कान नैनों की भाषा कान्हा तेरी है मतवाली मधुर मुस्कान नैनों की भाषा कान्हा तेरी है मतवाली
प्यार की ये शमा जल रही है इधर भी उधर भी, दोनों तरफ ही मिलने की चाहत एक सी लगी हुई है, प्यार की ये शमा जल रही है इधर भी उधर भी, दोनों तरफ ही मिलने की चाहत एक सी लगी...
मानव फिर क्यों रह सकता नहीं बिना मन मुटाव मानव फिर क्यों रह सकता नहीं बिना मन मुटाव
खता और वफा में बस इतना सा है अंतर जानेमन, खता और वफा में बस इतना सा है अंतर जानेमन,
एक हल्की सी हँसी को हमारी, कत्ल ~ए ~आम का नाम दिया।। एक हल्की सी हँसी को हमारी, कत्ल ~ए ~आम का नाम दिया।।
सफलता के इस बाजार में असफलता को दुत्कारा जाता है। सफलता के इस बाजार में असफलता को दुत्कारा जाता है।
हृदय की दूरियाँ बढ़ी इतनी अपने भ्राता नहीं अपने रहे, हृदय की दूरियाँ बढ़ी इतनी अपने भ्राता नहीं अपने रहे,
मन के अंतरंग कोनों से छन छन कर आती भावनाएं रचती हैं कविताएं। मन के अंतरंग कोनों से छन छन कर आती भावनाएं रचती हैं कविताएं।