Aditya Srivastav
Abstract
कब तक सुनता रहूँ मैं उनकी
होते जो अक़्सर साथ मेरे !
कब तक मैं उनका दिल रखूँ
खुद मेरा दिल भी पास मेरे !
दिल मेरा शहद का प्याला हाँ
कड़वे हैं पर अल्फाज़ मेरे !
पापा
नज़्म, गजल,शाय...
चाय की एक चुस...
भीड़ में तन्हा
दिल की बात
एहसास-ए-दिल
कलयुगी मानव
ग्लोबल विपदा
चाँद चमक जाता...
एक सैनिक की क...
सच कमज़ोर नहीं, लेकिन झूठ पर जीत पाने के लिए साथ कुछ बहाना भी ज़रूरी है। सच कमज़ोर नहीं, लेकिन झूठ पर जीत पाने के लिए साथ कुछ बहाना भी ज़रूरी है।
भगवान विष्णु की मदद से शिव की विकट समस्या हुई दूर। भगवान विष्णु की मदद से शिव की विकट समस्या हुई दूर।
पत्थरों के गलियारे से निकलते हुए न जाने क्यों ध्यान आकर्षित हुआ। पत्थरों के गलियारे से निकलते हुए न जाने क्यों ध्यान आकर्षित हुआ।
झूठ तो है एक नन्ही सी चिड़िया ,सच्चाई तो है निडर निर्भीक अडिग जैसे कोई बाज़ झूठ तो है एक नन्ही सी चिड़िया ,सच्चाई तो है निडर निर्भीक अडिग जैसे कोई बाज़
बात खाने की जब भी आती है, व्यंजनों की तस्वीर सामने नज़र आती है। बात खाने की जब भी आती है, व्यंजनों की तस्वीर सामने नज़र आती है।
देश की जनता से प्यार करते हो तो हमें छोड़कर क्यों चले गए? देश की जनता से प्यार करते हो तो हमें छोड़कर क्यों चले गए?
रिश्ते कुछ खास होते हैं शायद उनकी डोर उस प्रभु के पास होती है। रिश्ते कुछ खास होते हैं शायद उनकी डोर उस प्रभु के पास होती है।
हर्षित हो जाती है जनता। यहाँ प्रकाश पर्व जब मनता।। हर्षित हो जाती है जनता। यहाँ प्रकाश पर्व जब मनता।।
इसलिए सफ़र के इम्तिहानों को, सहज करते चलो स्वीकार। इसलिए सफ़र के इम्तिहानों को, सहज करते चलो स्वीकार।
सही उपयोग से ही सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता। सही उपयोग से ही सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता।
कटने के लिए तो, कट जाती है ये ज़िन्दगी ज़रूर, जिया तभी जाता, जब साथ हो कोई रिश्ता प्या कटने के लिए तो, कट जाती है ये ज़िन्दगी ज़रूर, जिया तभी जाता, जब साथ हो कोई रि...
वक्त रहते करो बात, इससे पहले कि बनकर रह जाए याद। वक्त रहते करो बात, इससे पहले कि बनकर रह जाए याद।
आज मना रहे थे वे खुशियाँ इंतजार था सबको कृष्ण भगवान का। आज मना रहे थे वे खुशियाँ इंतजार था सबको कृष्ण भगवान का।
बस इसी नजरिये से लोग एक-दूसरे पर हावी पड़ रहे है। बस इसी नजरिये से लोग एक-दूसरे पर हावी पड़ रहे है।
कार्य आजादी से किया कहीं कोई बंदिश नहीं कहीं कोई दीवार नहीं इसी को कहते हैं आजादी कार्य आजादी से किया कहीं कोई बंदिश नहीं कहीं कोई दीवार नहीं इसी को कहते...
खुशहाली को बढ़ते देखा है खेतों खलिहानों को कभी लहलहाते कभी बंजर होते देखा है। खुशहाली को बढ़ते देखा है खेतों खलिहानों को कभी लहलहाते कभी बंजर होते देखा...
बाट जोहता किसान। सुख-शांति का जीवन जगे। देश रहे कृषि प्रधान। बाट जोहता किसान। सुख-शांति का जीवन जगे। देश रहे कृषि प्रधान।
मैं आंखों को बंद कर खुद में तुझे देखता हूं तुझे आस पास अपने बार बार महसूस करता हूँ मैं आंखों को बंद कर खुद में तुझे देखता हूं तुझे आस पास अपने बार बार मह...
वक्त कभी रुका रुका दिखता है कभी बेतहाशा भागने लगता है वक्त कभी रुका रुका दिखता है कभी बेतहाशा भागने लगता है
छोटे करेंगे बड़ो का सम्मान, एक दूजे का सब रखेंगे ख़्याल। छोटे करेंगे बड़ो का सम्मान, एक दूजे का सब रखेंगे ख़्याल।