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PRATAP CHAUHAN

Abstract

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PRATAP CHAUHAN

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नजर

नजर

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लग जाये दुआ, ना लगे नज़र ।

करता हूं कामना प्रत्येक प्रहर ॥


चिलमन से देख लूँ शहर-शहर ।

उन नव किरणों की सरस लहर ॥


बन जाऊं मैं एक युगल पथिकI

ना राह में आए कोई भंवर॥


राह सुगम जीवन को सफलI

मंज़िल है, जहां खुशियों का शहर॥



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