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Aditya Srivastav

Abstract

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Aditya Srivastav

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पापा

पापा

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पापा, तेज धूप में

 सिर पर ठंडी छांव के तरह


विपरीत लहरों से लड़ती

निर्भीक निडर नांव के तरह


जिनके ही पद चिन्हों पे

चलते हैं ये पाँव दो सदा,


पापा वो जो बनते मलहम

हमारे हर घाव पे सदा !


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