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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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बेवजह रूठ जाता है

बेवजह रूठ जाता है

1 min 225 1 min 225

कुछ  नहीं  होता  जब  दिल टूट जाता है

होता है तब जब कोई अपना बेवजह रूठ जाता है


आप क्या जाने आप को इसकी क्या खबर

की एक शख्स के रूठ जाने से जिंदगी रूठ जाता है


अब  तो  मैं  अक्सर  यही  सोचता रहता हूँ

की कैसे वक़्त के साथ आँख का आँसू सूख जाता है


आप उसे अपनी आँखों में बसाएँ या दिल में जगह दें

जिसे छूटना होता है वो आखिरकार छूट जाता है


ये इंसानी रिश्ते ख़्वाब और किसी अजनबी का प्यार

शीशे की तरह होते हैं जरा सा दाब पड़ने पर टूट जाता है 



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