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Shyam Kunvar Bharti

Abstract


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Shyam Kunvar Bharti

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कर्म

कर्म

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भला बुरा जो तुमने किया ,

किसी ने न देखा ,....

मगर उसने देख लिया।

किसी से दगा किसी से वफा ,

किसी से सच किसी से झूठ ,

तुमने सोचा बहुत अच्छा किया।

किसी से लूट किसी से खसोट ,

किसी की चोरी किसी से सीनाजोरी

तुमने सोचा अब जंग जीत लिया।

किसी का दिल किसी का तन दुखाया,

हक मारा किसी और खून के आँसू रुलाया ,

सुना न किसी की और मनमानी किया।

अपनों से प्यार गैरो से नफरत

खुद का दर्द बड़ा गैर का मज़ाक

यह कैसा तूने इंसानियत दिखाया।

हुये जब पॉज़िटिव कोरोना से ,

हाय तौबा मचाया सांस के लिए ज़ोर लगाया

हुए जब अपने पॉज़िटिव घर से बाहर भगाया।

मर गया कोई अपना लाश हाथ न लगाया ,

दो गज कफन चार कंधा न लगाया।

सड़ गई लाश बिरान चील कौओ नोचवाया।

इंसानियत से बड़ा कोई नहीं ,

तूने ये क्या किया तूने ये क्या किया।

 


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