STORYMIRROR

Madhu Gupta "अपराजिता"

Romance Tragedy Fantasy

3  

Madhu Gupta "अपराजिता"

Romance Tragedy Fantasy

ग़ज़ल...

ग़ज़ल...

1 min
182

जब हंसी चुरा कर जाओगे तो थोड़ा सा तो घबराओगे l

अपने मन के कोने में कहीं तो थोड़ी सी हलचल पाओगे ll

जब भी मुझको तन्हा और उदास बैठा पाओगे l

तब मन ही मन तुम पीड़ा से ख़ुद से ही भर जाओगे ll

जैसे चुराकर सीप से मोती अंजाना ले जाता है l

जाते-जाते तुम भी तो काम वही कर जाओगे ll

जब जब देखोगे खिलती कलियां पेड़ों पर कैसे मुस्काती हैं l

तब हंसी हमारी को तुम बोलो कैसे पास अपने रख पाओगे ll

जब हंसी चुरा कर जाओगे तो थोड़ा सा तो घबराओगे ll



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance