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Sudershan kumar sharma

Romance

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Sudershan kumar sharma

Romance

गजल(तन्हा)

गजल(तन्हा)

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 जख्म इतने गहरे दिए

दर्द का सरूर दिखने लगता है। 


बोलते हो कसम खा कर जब,

झूठ भी सच लगने लगता है। 


रिश्ता लोग अब कहां पहचानते हैं, 

भीड़ में भी आदमी तन्हा दिखता है। 


प्रेम करना सीखना है तो

सीख फूल से, खुशबू जो

अपनी सब को देता है। 


दुख वो ही देता है जीवन में, इंसान जिसे खूब चाहता है। 

रहता है परेशान हर घड़ी

वक्त के साथ जो नहीं चलता है। 

भूल चूक अपनी सुधार ले

सुदर्शन तेरे पास अभी भी 

मौका है। 

रख नीयत नेक अपनी

जीवन अगर सफल चाहता है। 

अच्छाई, बुराई का हिसाब होगा आखिर

फिर दगे क्यों कमाता है



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