Mrugtrushna Tarang
Romance
महकने से
करो गिला, ग़ुल से
क्यों हो ख़फ़ा से !
आज़ाद हिंद के ...
आख़िर क्यों?
ग़नीमत है तुम ...
तपती धूप
होली की फ्लाई...
तुमसे ही..
मूषक जी परनाम...
बेशकीमती नगीन...
न रहा ऐतबार
गीले शिकवे
बस भगवान बेवफ़ाई कर गया आज वो चला गया। बस भगवान बेवफ़ाई कर गया आज वो चला गया।
अक्सर तन्हा रातों में ये जगने लगा है आजकल। अक्सर तन्हा रातों में ये जगने लगा है आजकल।
समाज के ठेकेदारों ने तो जुल्मी होने का काम किया अहम की शान्ति को रीति रिवाजों का नाम. समाज के ठेकेदारों ने तो जुल्मी होने का काम किया अहम की शान्ति को रीति र...
आज भी तुम्हारी राह देख रहे हैं, पर तुम आज भी नहीं आये। आज भी तुम्हारी राह देख रहे हैं, पर तुम आज भी नहीं आये।
शराब से भी ज्यादा नशा है, इस पहला प्यार में। शराब से भी ज्यादा नशा है, इस पहला प्यार में।
तेरी आरजू सा क्यों है न जाने आज भी तेरी जुस्तज़ु सा क्यों है। तेरी आरजू सा क्यों है न जाने आज भी तेरी जुस्तज़ु सा क्यों है।
मरते दम तक मेरी प्रियतम, साथ तुम्हारा ना छोडूंगा। मरते दम तक मेरी प्रियतम, साथ तुम्हारा ना छोडूंगा।
काश बाबा इस धरा पर फिर से तुम आते काश बाबा इस धरा पर फिर से तुम आते
छुपा लूंगा तुम्हें पलकों में जाने ना दूंगा इस बार। छुपा लूंगा तुम्हें पलकों में जाने ना दूंगा इस बार।
तकदीर का मारा कुछ हिस्सा तेरा था कुछ हिस्सा मेरा था ! तकदीर का मारा कुछ हिस्सा तेरा था कुछ हिस्सा मेरा था !
तेरे प्यार की बरखा को तब मेरा प्यासा मन तरसा था तेरे प्यार की बरखा को तब मेरा प्यासा मन तरसा था
मेरे चेहरे की उदासियां तुम्हें बुलाती हैं, पढ़कर ज़रा चखो इन्हें... मेरे चेहरे की उदासियां तुम्हें बुलाती हैं, पढ़कर ज़रा चखो इन्हें...
एक और कदम तुम्हारी ओर खुद के साथ। एक और कदम तुम्हारी ओर खुद के साथ।
फ़क़त उसने बातें ही की थी किसी से। मगर दिल ये मेरा जला है पता है। फ़क़त उसने बातें ही की थी किसी से। मगर दिल ये मेरा जला है पता है।
नयीं यादों को जोड़ने में गुम हो जाना वो यादें। नयीं यादों को जोड़ने में गुम हो जाना वो यादें।
अपने मस्तक को आराम देती हो और किसी के स्वप्न में लीन हो जाती हो। अपने मस्तक को आराम देती हो और किसी के स्वप्न में लीन हो जाती हो।
ओ क्या कुछ कहना है आपको, कुछ कहना है आपको। ओ क्या कुछ कहना है आपको, कुछ कहना है आपको।
दिवानों को इंतजार हुआ करता था मेरा जो बैठे बैठे नजरें भर के देखा करते थे बुजुर्गों के नाम भी शामिल... दिवानों को इंतजार हुआ करता था मेरा जो बैठे बैठे नजरें भर के देखा करते थे बुजुर...
सूरत अपनी कब दिखलाओगे सच बतलाओ तुम कब आओगे। सूरत अपनी कब दिखलाओगे सच बतलाओ तुम कब आओगे।
मुँह से अपने विष उगलना ऐसे फितरत है तेरी। मुँह से अपने विष उगलना ऐसे फितरत है तेरी।