Mrugtrushna Tarang
Romance
महकने से
करो गिला, ग़ुल से
क्यों हो ख़फ़ा से !
आज़ाद हिंद के ...
आख़िर क्यों?
ग़नीमत है तुम ...
तपती धूप
होली की फ्लाई...
तुमसे ही..
मूषक जी परनाम...
बेशकीमती नगीन...
न रहा ऐतबार
गीले शिकवे
अपने प्यार को याद करते हुऐ प्रेमिका का प्रेमी को उन यादों को मिटा सकने को ललकारना........ अपने प्यार को याद करते हुऐ प्रेमिका का प्रेमी को उन यादों को मिटा सकने को ललकारन...
जिसमें दुनिया की सारी खूबसूरती समाहित है जो एक ऐसा दर्पण है! जिसमें दुनिया की सारी खूबसूरती समाहित है जो एक ऐसा दर्पण है!
जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहते हैं। जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहत...
तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार। तब अपने अपने धर्म को उच्च बताने का ये समाज करते हैं व्यापार।
हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा। हृदय क्षितिज में घर्राते बादल, गर्जना छोड़ , बरसात बरसा।
तुम्हें कैसे पता उसका, मेरे मन की जो दुविधा हैं कि पूरा होने की चाहत में, तुम्हें कैसे पता उसका, मेरे मन की जो दुविधा हैं कि पूरा होने की चाहत में,
अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा। अर्ध मौन, अर्ध अभिव्यक्ति तुम तुम अर्ध प्रेम की भाषा।
तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख दें। तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख ...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
प्रेम का ख़याल प्रेम से भी बड़ा और आकर्षक होता है। प्रेम का ख़याल प्रेम से भी बड़ा और आकर्षक होता है।
मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था। मैं जहाँ हूँ, जिस मोड़ पर हूँ मुझे सब बेईमानी लगना चाहिए था।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे ! खिले पँखुरिया ज्यों गुलाब की , ऐसे अधर खिले तेरे !
इश्क़ की बात मत करो मुझसे मैं टूट चुकी हूँ इस मोहब्बत के किरदार में इश्क़ की बात मत करो मुझसे मैं टूट चुकी हूँ इस मोहब्बत के किरदार में
इस बढ़ती जवानी में कोई किसी को पसंद भी करेगा कभी सोचा भी नहीं था हमने। इस बढ़ती जवानी में कोई किसी को पसंद भी करेगा कभी सोचा भी नहीं था हमने।
रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना। रे पागल मन यहाँ किसका हुआ तू दीवाना कैसे बताऊँ तुझे कितना ज़ालिम है ज़माना।
अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई। अनुरागी लालिमा कपोलों पर छटा इंद्रधनुषी-सी खिल गई।
खिलौने तो ख़रीद लूँगा पर खिलौनों से भी कहीं जी बहलता है खिलौने तो ख़रीद लूँगा पर खिलौनों से भी कहीं जी बहलता है