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Kishan Negi

Tragedy

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Kishan Negi

Tragedy

घर आजा घर आजा

घर आजा घर आजा

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क्यों है बेचैन क्यों होता है नाहक परेशान

ये फ़ितरत है उसकी मत हो इतना हैरान

जो मेरी न हो सकी तेरी भला क्या होगी 

रात अब तक नशे में है सुबह क्या होगी 

रे बावरे मन पंछी उड़ चला अपने परदेश 

लौट कर घर आजा घर आजा घर आजा 


जो बेवजह रूठ गया उसे मनाना क्यों

कांटों को इस गले का हार बनाना क्यों

रास्ते जुदा-जुदा मौसम भी बदल गया 

बेवफ़ा की मुस्कान पर क्यों फिसल गया 

रे बावरे मन ख्यालों का बुलबुला था वो

लौट कर घर आजा घर आजा घर आजा


गहराई तेरे दर्द की वह भला क्या जाने

बड़ी बेदर्द है दुनियाँ तू माने या न माने

कशिश की चिंगारी सुलगा कर चली गई 

बेगुनाह मोहब्बत यहाँ हर बार छली गई

रे बावरे मन टूटा टूटा-सा ख़्वाब था वह 

लौट कर घर आजा घर आजा घर आजा


वो नहीं तो क्या कोई और मिल जायेगा

उजड़े बाग़ में भी नया फूल खिल जायेगा 

क्यों ख़फ़ा है बसंत ऋतु फिर से आई है

आंचल में बाँध कर खुशियाँ भर लाई है 

रे बावरे मन क्यों भटक रहा गली-गली 

लौट कर घर आजा घर आजा घर आजा।



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