STORYMIRROR

प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

Tragedy

3  

प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

Tragedy

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
221

मेरा भी तो मुकम्मल आशियाँ था,

जमीन थोड़ी और पूरा आसमाँ था।१


कभी तो कर के वादा भी निभाते,

यही तो आस तुमसे हमनवाँ था।२


अगर मिलता न तू हमदम समझ लो,

मेरा ये दिल भी एक खाली मकान था।३


सियासी रंजिशे बढ़ने लगी अब,

चला ऐसा चुनावी कारवाँ था।४


निकलकर अब मेरे दिल से चला जा,

कभी बनकर रहा तू राजदान था।५


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy