STORYMIRROR

संदीप सिंधवाल

Tragedy

4  

संदीप सिंधवाल

Tragedy

वो टोपियां बेचता था साहब

वो टोपियां बेचता था साहब

1 min
562

एक दिन बाजार में दंगे भड़क गए जी

धार्मिक आस्था को ले झगड गए जी।


एक आदमी जो सिर्फ एक आदमी था

हिन्दू मुस्लिम में शायद एक कोई था।


अपनी दुकान पे टोपी बेचता था साहब

गोल लंबी सी, धर्म ना देखता था साहब।


तो उससे पूछा गया मजहब बता अपना

बोला सबकी टोपी बेचना काम अपना।


हिन्दू बोला लंबी टोपी मत बेचना अब 

मुस्लिम वही लंबी टोपी तू फेंकना अब।


कसमाकस में वो मारा गया बीच बाजार

कसूर ये की वो टोपी बेचता था साहब।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy