STORYMIRROR

Rewa Tibrewal

Tragedy

3  

Rewa Tibrewal

Tragedy

बाजार

बाजार

1 min
801


बाजार सजा है

तुम्हारी प्यास बुझाने को

तुम वहां रोज़ जाते हो

फिर भी उसे वैश्या कह

तिरस्कृत करते हो

और ख़ुद सम्मानित

कहलाते हो


बीवी के रहते हुए भी

रासलीला रचाते हो

और ख़ुद को कृष्ण

सरीखे बताते हो


इतने सब पर भी

जाने क्या बाकी

रह जाता है कि

तुम बलात्कार

पर बलात्कार

करते हो

ख़ुद को तो बाइज्ज़त बरी

कर लेते हो और

उसको पीड़िता बता

बहिष्कृत करते हो


उसके पहनावे

उसके चलने के तरीके

उसके मेकअप

उसके घर से बाहर

निकलने के समय

सब पर दोष मढ़ते हो

पर ख़ुद को साफ़

बचा लेते हो ..


हर बार लगातार

सारी परिस्थियों में

ख़ुद को दोषरहित

बताते हुए

साफ़ बचा लेते हो !!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy