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Niharika Singh (अद्विका)

Inspirational Tragedy

5.0  

Niharika Singh (अद्विका)

Inspirational Tragedy

अस्तित्व

अस्तित्व

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मैं अपने आप को

तलाशती रही और

तुम कहते रहे-

तुम हो मेरे अपने।


मैं सहज सब स्वीकारती रही

जो तुमने कहा।

तुमने मुझे विश्वास दिलाया-

तुम मेरी दुनिया हो,

मेरी पहचान हो।


तुममें तलाशती रही

अपना अस्तित्व।

कभी मैंने जाना ही नहीं

तुमसे अलग कोई

पहचान है मेरी ।


एक अलग आकाश है

जहाँ मैं बुन सकती हूँ

अपने सपनों का ताना-बाना।


आज जब तुम नहीं हो,

तोड़ दी वो दीवारें

जो बना रखी थी

मेरे चारों ओर।


उतार फेंकी वो बेड़ियाँ

जिसमें जकड़ी

विवश खड़ी थी मैं।


पहचाना स्वयं को

लिख सकती हूँ मैं भी

अपनी कहानी अपने हाथों।


रच सकती हूँ

एक नया इतिहास।

नारी केवल शतरंज का

एक मोहरा नहीं,

जीवन संग्राम में

एक कुशल योद्धा है।।


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